पर्वत पर हममें से कोई अकेला नहीं है।

पेम्बा उमोजा द्वारा एक सूक्ति

कविता “वह पर्वत जो हम चढ़ते हैं” से

पर्वत पर हममें से कोई अकेला नहीं है।
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