वह पर्वत जो हम चढ़ते हैं

हम अकेले नहीं चढ़ते।

वह पर्वत जो हम चढ़ते हैं — a poem by Pemba Umoja

इस पर्वत पर कोई अकेला नहीं।

हमारे पास साज़-ओ-सामान हैं, पिट्ठू, हमारे क्रैम्पन और कुल्हाड़ियाँ,
पर हम कहीं अधिक साथ लिए चलते हैं।

मित्रों के शब्द और शुभकामनाएँ,
पूर्वजों की विरासत,
आत्माओं का मार्गदर्शन।

ऊँची चोटियों पर हम अकेले नहीं चलते।
हम चलते हैं हर उस व्यक्ति के संग, जो मायने रखता है।

और पहाड़ों की खामोशी में
और तैरते बादलों में,
हम उनसे बातें करते हैं
हर एक कदम पर।

सबसे दुर्गम हिस्सों में हम फिर से एक हो जाते हैं।

वे हमारे हाथ थाम लेते हैं
और हमारे दिल भी।

यह सिर्फ़ पर्वत नहीं जिसे हम चढ़ते हैं।

अकेले नहीं है यह आरोहण।

A poem by Pemba Umoja