बीती पीढ़ियों की शाखाओं पर ही हम ऊपर उठे हैं।

पेम्बा उमोजा द्वारा एक सूक्ति

कविता “भीतर के पेड़” से

बीती पीढ़ियों की शाखाओं पर ही हम ऊपर उठे हैं।
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