{"seoTitle":"तुम कौन बनोगी? — एक लघु कथा | पेम्बा उमोजा कहानियाँ","seoDescription":"एक पिता की उम्मीदों, एक बेटी के बहुत देर से दिखाए गए साहस, और वह बनने में लगने वाले वर्षों के बारे में एक लघु कथा, जो आपको हमेशा से बनना था। पेम्बा उमोजा द्वारा।","keywords":"पारिवारिक उम्मीदों पर लघु कथा, पिता और बेटी की लघु कथा, अपने सपनों का पीछा करने की कहानी, वयस्कों के लिए साहित्यिक लघु कथाएँ, साहस की कहानी, पेम्बा उमोजा","content":{"p1":"पिता रात के खाने पर पीछे टिककर बैठ गए, अपनी बेटी को ध्यान से देखते हुए। उनकी आँखें उसके चेहरे से नहीं हटीं।","p2":"“मेडिकल स्कूल में दाख़िला मिलने पर बधाई हो,” उन्होंने कहा।","p3":"“मेडिकल स्कूल? पर मैंने तो मेडिकल स्कूल के लिए आवेदन नहीं किया था, पिताजी।”","p4":"“मुझे पता है। मैंने तुम्हारी तरफ़ से आवेदन किया था, और तुम्हारा दाख़िला हो गया। काहिरा मेडिकल स्कूल। तीन हफ़्तों में तुम्हारी पढ़ाई शुरू होगी।”","p5":"“पर मैं मेडिकल स्कूल नहीं जाना चाहती, पिताजी।”","p6":"पिता झटके से उठ खड़े हुए और अपने बड़े-बड़े हाथ मेज़ पर रख दिए।","p7":"“तुम्हारा मेडिकल स्कूल में दाख़िला हुआ है। तुम मेडिकल स्कूल जाओगी।”","p8":"उनकी आँखें उसके चेहरे से नहीं हटीं।","p9":"उसने नज़रें झुका लीं।","p10":"“जी, पिताजी।”","p11":"और वह दो हफ़्तों के लिए गई, और फिर घर लौट आई।","p12":"“मैं नहीं कर सकती, पिताजी। बस नहीं कर सकती।”","p13":"उसके पिता ने उसे तीखी नज़रों से घूरा।","p14":"“तो फिर तुम इंजीनियर बनोगी।”","p15":"उसने फिर से नज़रें झुका लीं।","p16":"“जी, पिताजी।”","p17":"और वह एक इंजीनियर बन गई, मास्टर डिग्री के साथ एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर।","p18":"और बीस साल गुज़र गए, एक तलाक़ और दो बच्चों के बाद, उसने अपने पिता को फ़ोन किया।","p19":"“मैं नहीं कर सकती, पिताजी। बस नहीं कर सकती।”","p20":"उसके पिता उसे सागर पार से फ़ोन पर घूर नहीं सकते थे।","p21":"“मैं एक बावर्ची बनना चाहती हूँ, पिताजी।”","p22":"“क्या? और सैंडविच बेचोगी,” वह चिल्लाए। “मैं लोगों को क्या बताऊँगा?”","p23":"“आप लोगों को क्या बताते हैं, मुझे परवाह नहीं,” उसने जवाब दिया, मुँह से निकलते अपने ही शब्दों पर हैरान होकर।","p24":"“तो मैं तुम्हें बेदख़ल करता हूँ,” उन्होंने फ़ोन रखते हुए ऐलान किया।","p25":"और वह बावर्ची बनी भी, और एक रेस्तराँ की मालकिन भी, और उस पुराने रिसॉर्ट वाले शहर में सबसे उम्दा हुम्मुस और घर की बनी पिटा ब्रेड बनाने वाली भी।","p26":"कुछ साल बाद उन दोनों में बात हुई।","p27":"उसके पिता ने सुना।","p28":"वह मुस्कुराए।","p29":"उन्होंने लोगों को बताया। उन्होंने सबको बताया कि उनकी बेटी क्या करती है।","p30":"उन्होंने इतने लोगों को बताया कि लोग अक्सर उन्हें चले जाने को कहते थे।","p31":"और इन सबके बावजूद, वह वही बनी जिसके लिए वह हमेशा से बनी थी।","p32":"और वह वैसे पिता बने जैसे उन्हें हमेशा होना चाहिए था।"}}