{"content":{"p1":"जब चादर ओढ़े वह दर्शक गाँव में आया","p2":"उसके हाथ में एक लालटेन थी। उसकी लौ बैंगनी और लाल का अजीब-सा मिश्रण थी। उसके बाएँ सीने पर लंबे डंठल वाला काँटों भरा एक गुलाब लगा था।","p3":"वह नंगे पाँव था।  उसके पास कोई सामान नहीं था।","p4":"गाँववाले सोचने लगे, कहीं वे किसी सपने के भीतर तो नहीं जागे।","p5":"वह चला और गाँव के कुएँ के पास रुका। रस्सी से बाल्टी खींची।   प्यास बुझाने को कटोरी होंठों से लगाई।","p6":"गुलाबी रंग का पानी उसके पैर की उँगलियों के बीच से बह निकला।  उसके पैरों के चारों ओर एक ताल बना दी।","p7":"एक भारी कोहरा शहर में लुढ़कता आया। टम्बलवीड की तरह।  उसने उसे ढक लिया।  हवा गरजी और गाँववालों के दरवाज़ों पर दस्तक दी।","p8":"उन्होंने दरवाज़े नहीं खोले।  आँधी थम गई।  भोर के साथ मौन उतरा।","p9":"कुएँ के पास कुछ नहीं बचा। सिवाय एक लाल गुलाब के। पत्थर की दरारों से उगता हुआ।"},"seoTitle":"गुलाब — पेम्बा उमोजा की एक लघुकथा","seoDescription":"एक चादर ओढ़े अजनबी सोते हुए गाँव में आता है, हाथ में अजीब लौ वाली लालटेन और काँटों भरा गुलाब लिए। पेम्बा उमोजा का एक शांत दृष्टांत।","keywords":"गुलाब लघुकथा, साहित्यिक दृष्टांत, रहस्यमय अजनबी, गाँव का कुआँ, जलरंग दंतकथा, पेम्बा उमोजा कहानियाँ"}