{"seoTitle":"अबीगेल और एब — प्रेम, काम और समय पर एक लघुकथा","seoDescription":"अबीगेल को काम से प्यार था। एब को घूमने से प्यार था। साथ रहने के दो तरीकों और इंतज़ार की क़ीमत पर एक मार्मिक लघुकथा।","keywords":"लघुकथा, प्रेम और काम, विवाह, समर्पण, पछतावा, समय, मृत्यु, चिंतनशील कथा","content":{"p1":"अबीगेल को काम करना बेहद पसंद था। वह सुबह आठ से रात आठ तक बिना उठे बैठ सकती थी, बस एक-दो बार एक-एक मिनट के लिए शौचालय जाती और बीस मिनट मेज़ पर बैठकर खाना खाती।","p2":"काम के बाद रात का खाना बनाना, फिर टीवी, सोफ़े पर तीन घंटे लेटना, और फिर नींद।","p3":"एब को, इसके विपरीत, बैठना पसंद नहीं था। जब वह काम करता, खड़े होकर करता। वह बेचैन रहता था। कभी बैठता, खड़ा होता, बैठता, खड़ा होता, बैठता, खड़ा होता, और फिर लंबी सैर पर निकल जाता—देखता, सराहता, घूमता।","p4":"उसे नदी किनारे चलना बहुत भाता था। वहाँ भी गाड़ियों की आवाज़ें आती थीं, पर इतनी नहीं।","p5":"कभी एब अबीगेल को सैर के लिए मना लेता। कभी अबीगेल एब को टीवी देखने के लिए मना लेती।","p6":"एब हमेशा के लिए निकल जाना चाहता था, इस भीड़भरे शहर को एक बार में ही छोड़ देना चाहता था।","p7":"अबीगेल काम करना चाहती थी।","p8":"उनके पास इतना पैसा पहले ही था कि वे जो चाहें वही करें, पर अबीगेल जो सबसे अधिक चाहती थी, वह था—काम करना।","p9":"एब डॉक्टर के पास गया। उसे पता चला कि उसके पास जीने को ज़्यादा समय नहीं है। ज़्यादा से ज़्यादा पाँच साल, शायद दो-तीन, हो सकता है केवल एक।","p10":"\"मैं तुम्हें कहीं जाने से नहीं रोक रही,\" अबीगेल चिल्लाई। \"अगर जाना चाहते हो, तो जाओ।\"","p11":"एब का सपना हमेशा यही रहा था कि वह अबीगेल के साथ आज़ाद हो, जगह-जगह रहे, दुनिया देखे, ज़िंदगी जिए।","p12":"उसने अबीगेल का इंतज़ार किया, सर्द जाड़ों और तपती गर्मियों में भी शहर में टिका रहा।","p13":"जब वह सुबह आठ से रात आठ तक कंप्यूटर पर टाइप करती, वह उसके पैरों के पास फ़र्श पर सिमट कर बैठ जाता।","p14":"एब अपनी सैर पर अब भी जाता, पर बहुत दूर नहीं जाता।","p15":"एक साल बीत गया, फिर एक और। डॉक्टर लगभग ठीक ही कह रहे थे। एब को मरने में तीन साल लगे।","p16":"वह अबीगेल के साथ एक टीवी कार्यक्रम देखते-देखते चला गया।","p17":"अबीगेल ने एब को दफ़नाया, और फिर काम पर लौट गई।"}}