{"seoTitle":"कब — पेम्बा उमोजा द्वारा उपस्थिति और अब पर एक लघु कविता","seoDescription":"उपस्थिति पर एक फुसफुसाता ध्यान — जिस एकमात्र बात को हम सचमुच कभी जान पाते हैं, वह क्षण है जिसमें हम हैं। पेम्बा उमोजा की एक लघु चिंतनशील कविता।","keywords":"वर्तमान क्षण पर कविता, उपस्थिति पर कविता, सजगता की कविता, लघु मननशील कविता, अभी पर कविता, पेम्बा उमोजा की कविताएँ","s1l1":"कब","s2l1":"न जानूँ कहाँ","s2l2":"न जानूँ क्यों","s3l1":"न जानूँ कैसे","s3l2":"या क्या","s4l1":"इनमें से कुछ नहीं जानता मैं","s5l1":"बस कब","s5l2":"मैं थामे हूँ","s5l3":"इतने पास","s6l1":"बस कब","s6l2":"मैं साँस लेता हूँ","s6l3":"भीतर और बाहर","s7l1":"बस कब","s7l2":"लहरों की तरह धड़कता है","s7l3":"मेरी नसों में","s8l1":"बस कब","s8l2":"सबसे मीठे","s8l3":"पल","s9l1":"बस कब","s9l2":"एक ऐसी दुनिया में","s9l3":"जो किसी की प्रतीक्षा नहीं करती","s10l1":"और कुछ न जानूँ","s10l2":"बस कब","s11l1":"और वह कब","s11l2":"बन जाए","s12l1":"अभी।"}