{"seoTitle":"यही है जीवन - पेम्बा उमोजो की एक कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजो की एक मार्मिक, दार्शनिक कविता, जिसमें इंसानों की नोकझोंक के ऊपर कौवे मंडराते हैं, और बेतुकी बातों में मिलने वाले अर्थ का बोध होता है।","keywords":"यही है जीवन कविता, कौवों पर कविता, दार्शनिक कविता, मृत्यु पर कविता, पेम्बा उमोजो की कविताएँ","line1":"कौवे चक्कर काटते हैं।","line2":"इंसान झगड़ते हैं।","line3":"यह प्रेम की अधिक असामान्य अभिव्यक्तियों में से एक है।","line4":"कारण चाहे जो भी हो, यह एक कारण है।","line5":"सबसे सार्थक बात यही है कि कुछ भी सार्थक नहीं।","line6":"कौवे चक्कर काटते हैं।","line7":"इंसान भला क्यों न झगड़ें?","line8":"वे स्वयं नहीं आएँगे, पर वे जिसका प्रतीक हैं, वह अवश्य आएगा।","line9":"हम सब कुछ करने की होड़ में हैं,","line10":"कहीं, कुछ बनने की।","line11":"और यह अच्छा है, पर कौवे नहीं रुकते,","line12":"बस","line13":"मंडराते,","line14":"मंडराते,","line15":"मंडराते।"}