{"seoTitle":"वह पर्वत जो हम चढ़ते हैं — जीवन में अकेले न चलने के बारे में एक कविता","seoDescription":"मित्रों, पूर्वजों, और आत्माओं की उस अदृश्य संगत पर एक चिंतनशील कविता, जो जीवन की सबसे कठिन चढ़ाइयों में हमारे साथ चलते हैं। पेम्बा उमोजा द्वारा।","keywords":"पर्वत पर कविता, पूर्वजों पर कविता, अकेले न होने पर कविता, जीवन की चढ़ाई पर कविता, आध्यात्मिक कविता, पेम्बा उमोजा की कविताएँ","line1":"इस पर्वत पर कोई अकेला नहीं।","line2":"","line3":"हमारे पास साज़-ओ-सामान है, पिट्ठू, हमारे क्रैम्पन और कुल्हाड़ियाँ,","line4":"पर हम कहीं अधिक साथ लिए चलते हैं।","line5":"","line6":"मित्रों के शब्द और शुभकामनाएँ,","line7":"पूर्वजों की विरासत,","line8":"आत्माओं का मार्गदर्शन।","line9":"","line10":"ऊँची चोटियों पर हम अकेले नहीं चलते।","line11":"हम चलते हैं हर उस व्यक्ति के संग, जो मायने रखता है।","line12":"","line13":"और पहाड़ों की खामोशी में","line14":"और तैरते बादलों में,","line15":"हम उनसे बातें करते हैं","line16":"हर एक कदम पर।","line17":"","line18":"सबसे दुर्गम हिस्सों में हम फिर से एक हो जाते हैं।","line19":"","line20":"वे हमारे हाथ थाम लेते हैं","line21":"और हमारे दिल भी।","line22":"","line23":"यह सिर्फ़ पर्वत नहीं जिसे हम चढ़ते हैं।","line24":"","line25":"अकेले नहीं है यह आरोहण।"}