{"line1":"मैंने रेतघड़ी को उसके किनारे पर रखा","line2":"और रेत को बहते देखा।","line3":"हर चीज़ का एक अंत होता है,","line4":"मैं सोचता हूँ।","line5":"लेकिन तेरी आँखों और तुम्हारे लिए मेरे प्रेम में,","line6":"रेतघड़ी की रेत पहुँचती है","line7":"आकाश से मीलों दूर।","line8":"मेरे जीवन का कण","line9":"गिरने वाली पहली रेत है,","line10":"लेकिन तुम्हारे लिए मेरा प्रेम","line11":"सारी रेत को, रेतघड़ी को ही भर देता है,","line12":"और भाग्य के उस हाथ को भी जो","line13":"इधर-उधर घूमता है—","line14":"क्योंकि तुममें मेरा प्रेम","line15":"","line16":"","line17":"वह पराजित नहीं कर सकता।","seoTitle":"रेतघड़ी — समय और भाग्य से परे प्रेम की कविता","seoDescription":"एक चिंतनशील कविता जहाँ रेतघड़ी की रेत अनंत समर्पण की माप बनती है जिसे भाग्य भी नहीं हरा सकता — Pemba Umoja द्वारा।","keywords":"रेतघड़ी कविता, प्रेम और समय कविता, अनंत प्रेम कविता, भाग्य कविता, Pemba Umoja कविता"}