{"seoTitle":"अयनांत - एक छोटी शीतकालीन कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजा द्वारा सर्दियों की धूप में सपने देखने, पत्थर की पटियों में तारों की तरह चमकती पिघली बर्फ़, और भीतर अभी भी प्रतीक्षा कर रही रोशनी के बारे में एक छोटी कविता।","keywords":"अयनांत कविता, शीतकालीन कविता, सपनों पर कविता, तारों पर कविता, पत्थर की पटियों पर कविता, चिंतनशील कविता, पेम्बा उमोजा की कविताएँ","line1":"मैं सूरज के नीचे स्वप्न देख रहा था","line2":"","line3":"पिघली हुई बर्फ़ ने पत्थर की पटियों में छोटी-छोटी नालियाँ बना दी थीं","line4":"जो सुबह के देर पहर में तारों भरे आकाश की तरह झिलमिलाती थीं","line5":"","line6":"यद्यपि कड़ाके की ठंड थी,","line7":"धूप ने मेरे चेहरे को इतना गर्म कर दिया कि मुझे ग्रीष्मकाल याद आ गया","line8":"","line9":"पत्थर की पटियों के गड्डों में तारों ने खोए हुए सपनों की यादें ताज़ा कर दीं","line10":"जो समय के श्याम ब्रह्मांड में तैर रहे थे","line11":"","line12":"सर्दियों में सूरज के नीचे स्वप्न देखना।","line13":"","line14":"भीतर के तारों को निहारने में कभी देर नहीं होती","line15":"उन्हें जगमगाते देखने में","line16":"","line17":"और शायद उनकी किरणों तक पहुँचने और उन्हें छूने में भी।"}