{"line1":"मेरी कलम","line2":"सूखने वाली है","line3":"लेकिन मेरी कविता","line4":"अभी भी बोलती है","line5":"कितनी सारी","line6":"मैंने बस फुसफुसाई","line7":"हवा में","line8":"यह उम्मीद करते हुए","line9":"कि आसमान…","line10":"हिलाओ,","line11":"हिलाओ","line12":"थोड़ी और स्याही है","line13":"लेकिन कविता","line14":"निकल रही है","line15":"मेरी पकड़ से","line16":"हिलाओ,","line17":"हिलाओ","line18":"हिलाओ","line19":"हिलाओ","line20":"हिलाओ…","line21":"लगता है सबक","line22":"दो कलमें रखना है","seoTitle":"हिलाओ — प्रेरणा के सूखने पर कविता","seoDescription":"एक मरती हुई कलम से स्याही और प्रेरणा की आखिरी बूंदें निकालने पर व्यंग्यात्मक कविता।","keywords":"हिलाओ कविता, प्रेरणा कविता, लेखन कविता, सूखती स्याही"}