{"s1l1":"वे सब लोग।","s1l2":"वे जो दाहिनी ओर हैं।","s1l3":"और वे जो बाईं ओर हैं।","s1l4":"वे जो आगे हैं। वे जो पीछे हैं।","s2l1":"वे जो पुल के नीचे तेज़ कारों में हैं।","s2l2":"वह कठोर दिखने वाला आदमी।","s2l3":"और वह मीठी सी छोटी लड़की।","s2l4":"वह आदमी जो अपनी कार का दरवाज़ा खोल रहा है।","s3l1":"वे मुस्कुराते मॉडल होर्डिंग पर।","s3l2":"वे स्नीकर्स में तेज़ चलती महिलाएँ।","s4l1":"वह आदमी बिना जूतों के लड़खड़ाता हुआ।","s4l2":"बस का चालक।","s5l1":"वह लड़का भीड़ भरी फुटपाथ पर साइकिल चलाता हुआ।","s6l1":"वे सब लोग। तुम। मैं। हम सब।","s7l1":"घमंड के नीचे। कठोरता। व्यंग्य। बुद्धिमत्ता। उदासीनता। धन और निर्धनता।","s8l1":"ढिठाई के पीछे। बड़े अहंकार। निगमों का काँच। अपशब्द। गोदने और बो टाई।","s9l1":"हम सब चाहते हैं।","s9l2":"हम सब सपना देखते हैं।","s9l3":"हम सब लगभग मर मिटें इसके लिए।","seoTitle":"प्रेम — भीड़ में साझा मानवता पर एक कविता, पेम्बा उमोजा द्वारा","seoDescription":"भीड़ पर एक ध्यान — फुटपाथ पर एक-दूसरे से गुज़रते अजनबी — और हर सतह के नीचे वही एक मानवीय चाह।","keywords":"मानवता पर कविता, भीड़ कविता, चिंतनशील कविता, प्रेम कविता, पेम्बा उमोजा कविताएँ"}