{"seoTitle":"प्लाया डे बिकिनी पर लोबोस - पेम्बा उमोजा की एक कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजा द्वारा रचित एक शांत समुद्र तटीय कविता, जिसमें ढलती दोपहर की धूप में लोबोस की तरह धूप सेंकते शरीरों और एक विक्रेता का वर्णन है जो अनसुना आगे बढ़ता जाता है।","keywords":"प्लाया डे बिकिनी पर लोबोस कविता, उरुग्वे समुद्र तट कविता, प्लाया डे बिकिनी, ढलती दोपहर की कविता, शांत कविता, पेम्बा उमोजा की कविताएँ","line1":"लोबोस की तरह","line2":"समुद्र के पास","line3":"वे सिंकते हैं","line4":"गुनगुनी थपकियों में","line5":"ढलती दोपहर की धूप की।","line6":"स्टायरोफोम का संदूक लिए एक आदमी","line7":"हेलादोस बेचता है","line8":"और रेफ्रेस्कोस।","line9":"कोई नहीं सुनता।","line10":"वह चलता जाता है।","line11":"लहरें,","line12":"बच्चों की आवाज़ें,","line13":"तट से टकराकर गूँजती हैं।","line14":"लोबोस की तरह","line15":"वे लेटे हैं","line16":"ढलती दोपहर की धूप में।","line17":"एक आदमी स्टायरोफोम का संदूक लिए चलता जाता है।"}