{"line1":"उसे होने दो","line2":"उसे होने दो","line3":"","line4":"वह स्त्री जो वह बनना चाहती है","line5":"वे सपने जो वह संजोती है","line6":"","line7":"तुम्हारी कक्षा का चाँद नहीं","line8":"बल्कि आकाश में एक और ग्रह","line9":"","line10":"जिसे कई लोग","line11":"तारा समझ लेते हैं","line12":"","line13":"जो चमकता है","line14":"एक रंग में","line15":"","line16":"जो पूरी तरह उसका अपना है","seoTitle":"वह स्वयं — स्वायत्तता, पहचान और आंतरिक दीप्ति पर एक कविता","seoDescription":"एक कविता जो एक महिला के खुद होने के अधिकार का जश्न मनाती है — तुम्हारी कक्षा का चाँद नहीं, बल्कि आकाश में एक और ग्रह जो अपनी अनूठी आभा में चमकता है। Pemba Umoja द्वारा।","keywords":"वह स्वयं कविता, स्वायत्तता कविता, महिला सशक्तिकरण कविता, पहचान कविता, Pemba Umoja"}