{"seoTitle":"एक का ध्येय - पेम्बा उमोजा की एक कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजा की एक कविता जो हर दिन एक नेक काम, एक नई गति, एक ताज़ा विचार और एक नए दोस्त, और ऐसे दिनों से बनने वाले इंसान के बारे में है।","keywords":"एक का ध्येय कविता, दैनिक इरादे पर कविता, आत्म-सुधार पर कविता, सुबह के प्रण पर कविता, पेम्बा उमोजा की कविताएँ","line1":"यदि मैं कर पाता","line2":"एक नेक काम","line3":"यदि मैं अपनी आत्मा को जगा पाता","line4":"एक नए तरीक़े से","line5":"यदि मैं अपने शरीर को मिला पाता","line6":"एक नई गति से","line7":"एक नई अनुभूति से","line8":"एक नई लय से","line9":"यदि मैं अपने मन को समृद्ध कर पाता","line10":"एक ताज़े विचार से","line11":"यदि मैं मिल पाता","line12":"एक नए दोस्त से","line13":"बाँट पाता एक नई हँसी","line14":"रो पाता एक नया रोना","line15":"बढ़ा पाता हाथ","line16":"एक नई रूह की ओर","line17":"हर उस नए दिन","line18":"जब मैं जागता","line19":"साँस लेता","line20":"और घूमता","line21":"इस उपजाऊ धरती पर","line22":"तो कैसा इंसान","line23":"मैं बन जाता।"}