{"seoTitle":"हिरण - पेम्बा उमोजा की एक कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजा की एक कविता, एक हिरण के बारे में जो चारागाह, सरिता, और फलोद्यान में सहज अनुग्रह से घूमता है, फिर भी कुछ नहीं जानता।","keywords":"हिरण कविता, प्रकृति कविता, सहज अनुग्रह कविता, तितली-कुमुदिनी, पेम्बा उमोजा की कविताएँ","line1":"चौकड़ी भरते हिरण,","line2":"तुम जानते नहीं,","line3":"फिर भी तुम दिशा चुनते हो","line4":"ऐसी सटीकता से।","line5":"तुम सुंदरता से लाँघते हो","line6":"तितली-कुमुदिनियों के खेतों से होकर,","line7":"उछलती ट्राउट की धाराओं को पार करते हो,","line8":"गुज़रते हो बागों से, तीखी गंध से भरे","line9":"पके हुए फलों की।","line10":"फिर भी, तुम जानते नहीं।"}