{"seoTitle":"साँझ ढले कोलोनिया - पेम्बा उमोजो की एक कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजो की एक शांत कविता जो उरुग्वे के कोलोनिया में, रियो दे ला प्लाटा के पास एक पुरानी पत्थर की दीवार के बगल में, साँझ की आवाज़ों को गिनती है।","keywords":"साँझ ढले कोलोनिया कविता, कोलोनिया उरुग्वे कविता, रियो दे ला प्लाटा कविता, साँझ की कविता, शांतिपूर्ण कविता, पेम्बा उमोजो की कविताएँ","line1":"तुम सुनाई देती आवाज़ों को गिन सकते हो:","line2":"एक रुकती हुई साइकिल—","line3":"शोर जो सन्नाटे में घुल रहा है;","line4":"कदमों की आहट—","line5":"पत्थर की सड़क पर चप्पलें;","line6":"पेड़ों में ऊँचे गाते झींगुर;","line7":"बिल्ली पर भौंकता एक कुत्ता।","line8":"दीवार के पास जेरेनियम उगे हैं","line9":"जिस पर मैं यह लिख रहा हूँ—","line10":"एक पुरानी पत्थर की दीवार","line11":"कोलोनिया शहर में","line12":"रियो दे ला प्लाटा के किनारे।"}