{"seoTitle":"सबसे बड़ी लॉटरी - इंसान होने के उपहार पर एक कविता","seoDescription":"पेम्बा उमोजो की एक मनमौजी, आश्चर्य से भरी कविता, जिसमें ब्रह्मांड भर के जीव सबसे दुर्लभ पुरस्कार के लिए क़तार में इंतज़ार कर रहे हैं।","keywords":"सबसे बड़ी लॉटरी कविता, इंसान होने पर कविता, आश्चर्य पर कविता, ब्रह्मांड कविता, कृतज्ञता कविता, पेम्बा उमोजो की कविताएँ","s1l1":"वे हर आकार और रूप में आए","s1l2":"बड़े और छोटे ग्रहों से","s1l3":"छल्लों वाले और बिना छल्लों वाले","s1l4":"दृश्य और अदृश्य","s2l1":"यह थी","s2l2":"आख़िरकार","s2l3":"ब्रह्मांड की सबसे बड़ी लॉटरी।","s3l1":"क्या शानदार मौक़ा था!","s4l1":"अनंत काल में एक बार मिलने वाला अवसर!","s5l1":"एक जीवन भर के लिए इंसान होना","s6l1":"बस यही।","s6l2":"परम पुरस्कार","s7l1":"देह का होना","s7l2":"महसूस करना","s7l3":"चाहना","s7l4":"स्वाद चखना","s8l1":"इंसानी पैरों से नंगे पाँव चलना","s8l2":"घास, पानी, रेत, धरती पर","s9l1":"ऐसी चीज़ कौन चाहेगा?","s10l1":"हर कोई, हर जगह।","s11l1":"वे सभी जीव जो महसूस करना भूल गए हैं","s12l1":"वे सभी जीव जिन्होंने कभी जाना ही नहीं","s13l1":"क़तार लंबी है","s14l1":"यह ब्रह्मांड के एक छोर से दूसरे छोर तक फैली है।"}