सफ़ेद कमीज़
एक बालक, उसकी सबसे प्रिय कमीज़, और माँ का मौन पाठ
“पाउलो!
फिर वही। समुद्री शोरबे ने एक और कमीज़ बर्बाद कर दी!”
पाउलो चुपचाप अपनी माँ को देखता रहा।
“या तो तुम फिर कभी समुद्री शोरबा नहीं खाओगे, या फिर कभी सफ़ेद कमीज़ नहीं पहनोगे। चुनाव तुम्हारा है।”
“पर माँ, मैं तो बस समुद्री शोरबा ही खाता हूँ और बस सफ़ेद कमीज़ें ही पहनता हूँ। मैं क्या करूँ?” वह चिल्लाया, और उसके आँसू शोरबे में और उसकी पूरी सफ़ेद कमीज़ पर गिरने लगे।
“कल तुम्हारी परीक्षा है,” माँ ने घोषणा की।
“तुम अपनी सबसे प्रिय सफ़ेद कमीज़ पहनोगे और ऐसा समुद्री शोरबा खाओगे जैसा तुमने कभी नहीं खाया, जिसमें अतिरिक्त सीपियाँ होंगी।”
पाउलो कुर्सी पर कसमसाया। उसे सीपियाँ बहुत पसंद थीं।
अगले दिन पाउलो की माँ ने उसे चौंका दिया। वह उसे पूरे द्वीप के सबसे बढ़िया कैफ़े में ले गई। वह अपने समुद्री शोरबे के लिए प्रसिद्ध था।
बालक पहली बार ऐसी जगह आया था।
उसने अपनी कुर्सी आगे खींची, सफ़ेद कमीज़ में सीधा बैठ गया, और लिनन का नैपकिन अपनी गोद पर रख लिया।
वेटर एक सुंदर चम्मच के साथ पाउलो का शोरबा ले आया।
पाउलो ने उसे बड़ी सावधानी से उठाया। चार घंटे बाद भी बालक खा ही रहा था, पूरी कोशिश करता हुआ कि उस सुंदर चम्मच से एक बूँद भी न गिरे।
वेटर मेज़ के पास आया। “मुझे बहुत खेद है, पर हम बंद कर रहे हैं।”
बालक ने अपने शोरबे को देखा। आधा कटोरे में ही बचा था, पर उसकी सफ़ेद कमीज़ इतनी साफ़ पहले कभी नहीं रही थी।
माँ एक हाथ कमर पर रखकर उठी और मुस्कुराई।
“मुझे तुम्हारा शोरबा सबसे अच्छा लगता है,” धूल भरी गली में निकलते हुए पाउलो ने फुसफुसाया।
माँ इतनी चमक उठी कि उसकी मुस्कान पाउलो की कमीज़ की सफ़ेदी से मेल खा गई।
A story by Pemba Umoja