विचित्र

एक प्रत्यक्ष रहस्य

विचित्र — a story by Pemba Umoja

"वह व्यक्ति तो अच्छा है, पर उसके साथ कुछ और ही बात लगती है।"

"मैं समझा नहीं सकती। ठीक-ठीक बता भी नहीं सकती कि क्या है।"

"मैं समझ रही हूँ तुम क्या कहना चाहती हो।"

"मेरा मतलब है, वह एक सामान्य व्यक्ति ही तो लगता है, सैर पर जाता है, खरीदारी करता है, बागवानी करता है, काम करता है, पर यह पूरी तस्वीर नहीं लगती।"

"मैं समझ रही हूँ तुम क्या कहना चाहती हो।"

"फिर वह चुपके से दूर-दराज की जगहों पर, पर्वतारोहण के लिए चला जाता है।"

"हाँ, यह है तो अजीब।"

"शायद वह कोई जासूस या सुपरहीरो है।"

वह हँसती है।

"तुम्हें क्या लगता है, उसकी विशेष शक्तियाँ क्या हैं?"

"विचित्रता, गोपनीयता।"

"वह अपने पूरे जीवन का दिखावा नहीं करता। वह विवेकशील है।"

"उसे रहस्यमयी कहना ज़्यादा ठीक होगा।"

"शायद 'विचित्र' शब्द ही सही है।"

"हम तो बस उसका एक छोटा सा हिस्सा देखते हैं, उसका बाहरी आवरण, उसका दिखावा।"

"फिर भी वह काफी सच्चा है।"

"हाँ, पर वह कुछ छिपा रहा है।"

"तो क्या आज की दुनिया में लोगों को अपने बारे में सब कुछ बता देना चाहिए?"

"हर कोई बताता है।"

"हाँ, हर कोई बताता है।"

A story by Pemba Umoja