प्रयास
एक लड़का, एक मंदिर, और उसे दिया गया नाम
प्रयास ने मंदिर का दरवाज़ा खोला।
उसने नारंगी आँखों वाला एक सुनहरा बंदर देखा।
बंदर ने उससे बात की।
“तुम्हारा नाम क्या है?” उसने पूछा।
“प्रयास,” लड़का फुसफुसाया।
“मुझे चिढ़ाओ मत,” बंदर ने कहा।
“नहीं। ‘प्रयास’ मेरा नाम है। मेरे माता-पिता ने मुझे यह नाम इसलिए दिया ताकि जब भी कोई मुझे मेरे नाम से पुकारे, तो मुझे हमेशा प्रयास करने, कभी हार न मानने की याद आए।”
“तुम्हारे माता-पिता बहुत बुद्धिमान हैं,” बंदर ने टिप्पणी की, उसकी आँखें नारंगी से लाल हो गईं। “मैं उन्हें अभी देख सकता हूँ।”
“कहाँ?” प्रयास ने पूछा। “वे तो गुज़र चुके हैं,” उसने उदासी से कहा, उसकी आँख के कोने से एक आँसू लुढ़क गया।
“मैं उन्हें एक शांत जगह पर देख रहा हूँ,” बंदर ने उत्तर दिया। “वे मुस्कुरा रहे हैं।”
“मुझे उनकी याद आती है,” प्रयास फुसफुसाया।
“तुम्हारे माता-पिता हमेशा तुम पर नज़र रखते हैं,” बंदर ने जवाब दिया, “और उन्हें बहुत गर्व है कि तुमने उनके दिए हुए नाम का सम्मान किया है।”
A story by Pemba Umoja