सभी कतारों की माँ
एक यादगार कतार
कतार एक अंत से शुरू हुई और बाहर गई, फिर अंदर, फिर बाहर, फिर अंदर। "बाहर, अंदर, बाहर, अंदर," कतार गुनगुनाई।
"तो यही होता है जब सरकार विफल होती है," सुरक्षा गार्ड ने हँसते हुए कहा जब वह सभी नाराज़ यात्रियों को देख रहा था। आधे लोगों ने अपनी उड़ानें गंवा दीं। कुछ तो 5–6 घंटे पहले आए और फिर भी उनकी उड़ान छूट गई।
एक छोटे लड़के ने बाएँ, दाएँ, बाएँ, दाएँ देखा और बोला, "मम्मी, पापा, यह सबसे लंबी कतार है जिसमें मैं कभी खड़ा हुआ! क्या हम फोटो ले सकते हैं?"
दूसरों ने सुना।
वे भी अपने कैमरे और फोन निकालने लगे।
"क्या आप मेरी और मेरे परिवार की तस्वीर लेंगे?" एक सॉकर मॉम ने शिष्टता से पूछा, उसके मोती जैसे सफेद दाँत चमक रहे थे।
"बिलकुल, सब चीज़ बोलो," उनके पीछे के हँसमुख यात्री ने मज़ाक किया।
"अद्भुत," एक भिक्षु ने शांति से मंत्र पढ़ते हुए बुदबुदाया। "सब साथ मिलकर चलन ध्यान कर रहे हैं," वह मुस्कुराया।
एक चतुर उद्यमी ने पास में एक ठेला लुढ़काया। "पॉपकॉर्न बिकता है! अपना गरमागरम, हल्का नमकीन पॉपकॉर्न ले लीजिए!"
"क्या आप मेरी जगह बचाकर रखेंगे?" सॉकर मॉम ने अपने हँसमुख पड़ोसी से पूछा जब वह पॉपकॉर्न खरीदने दौड़ी।
वह गोद भरकर लौटी और अपने पड़ोसी को भी एक थैला दिया।
"कितना मज़ा!" उसने खुशी से कहा जब वह भाप निकलते थैले पर छोटी लिखाई पढ़ने के लिए आँखें सिकोड़ रहा था।
"सभी कतारों की माँ पॉपकॉर्न, इंक.," उसने हँसते हुए पढ़ा।
A story by Pemba Umoja