खामोश बच्ची
पहाड़ों के पार एक सफ़र
एक खामोश बच्ची थी जो पहाड़ों से घिरे एक बड़े शहर में रहती थी।
वह महासागरों, समुद्र तटों, और समुद्र के क्षितिज पर ढलते सूरज के सपने देखती थी।
एक दिन वह एक पहाड़ी रास्ते पर भाग निकली और क्लारो नामक एक जंगली घोड़े से मिली।
पहले तो वह डर गई।
“क्या घोड़ा मुझे चोट पहुँचाएगा?” उसने सोचा।
लेकिन फिर उसकी आत्मा में कुछ फुसफुसाया, और वह घोड़े पर सवार हो गई।
“मुझे ले चलो जहाँ तुम्हारी मर्ज़ी हो,” उसने आदेश दिया।
और घोड़ा उसे एक घुमावदार जंगली रास्ते से नीचे, नीचे, नीचे पहाड़ से उतारकर, दूसरी तरफ की घाटी से होते हुए, सीधे समुद्र तक ले गया।
जैसे ही नारंगी सूरज समुद्र के नीचे डूबा, वे एक साथ खड़े रहे।
“मैं घर आ गई,” वह मुस्कान के साथ फुसफुसाई।
“मैं घर आ गई।”
A story by Pemba Umoja