अमीर आदमी
सच्ची संपत्ति का दृष्टांत
अमीर आदमी अपनी बड़ी, सफ़ेद, महँगी कार में छोटे तटीय शहर तक आया। ऐसी कार इन गलियों में पहले कभी नहीं आई थी।
अमीर आदमी बाहर निकला, घृणा से चारों ओर देखता हुआ। "यह कैसी जगह है?"
फिर वह समुद्र देखने गली से नीचे चला गया। रास्ते में, उसका बटुआ गली में गिर गया और एक नाले में चला गया। वह जा चुका था, लेकिन उसे पता नहीं था।
वह समुद्र तक गया और गलियों से होकर तिरस्कार से गुज़रा। लोगों ने उसे देखा और मुस्कुराए। "यह एक अजीब जगह है," उसने सोचा।
कुछ देर चलने के बाद, उसे भूख लगी। "मुझे कुछ खाना चाहिए।"
कोने पर बाहर मेज़ों वाला एक कैफ़े था। वह भरा हुआ था, लेकिन उसके लिए एक मेज़ थी। वह बैठ गया, भूख से बेहाल।
दाम अच्छे थे, मेन्यू स्वादिष्ट। उसने ताज़ा जूस, सूप, मुख्य व्यंजन, और मिठाई का ऑर्डर दिया। वेटर चौंक गया। यह चार लोगों के लिए पर्याप्त खाना था।
अमीर आदमी ने खाया। उसकी आँखें ख़ुशी से घूम गईं। "पेरिस के सबसे शानदार रेस्तरां में भी इतने लज़ीज़ व्यंजन नहीं मिलते थे," उसने सोचा।
उसने दूसरे ग्राहकों की हँसी सुनी, उनकी मुस्कानें देखीं। उसने भी अपनी साँस के नीचे एक हँसी छोड़ी। "यह सच में एक अजीब जगह है।"
"बिल, कृपया।"
वेटर मुस्कुराते हुए बिल लाया। "यह नहीं हो सकता। बस इतना?" उसने सोचा, अपने बटुए के लिए हाथ बढ़ाते हुए।
वह वहाँ नहीं था। "क्या यह जगह चोरों से भरी है? क्या मुझे लूट लिया गया?"
उसने बेताबी से अपनी जेब टटोली। "ओह नहीं। यह मेरी पतलून से गिर गया होगा," उसने सोचा।
"कोई समस्या है, श्रीमान?" वेटर ने पूछा।
"मैं, अ, मैं, अ, मुझे बहुत खेद है। मुझे अपना बटुआ नहीं मिल रहा।"
"एक मिनट रुकिए। मैं मालकिन को बुलाता हूँ," वेटर ने कहा।
मालकिन एक बूढ़ी महिला थी। वह बाहर आई। "सब ठीक है, श्रीमान? मैंने सुना आपका बटुआ नहीं मिल रहा।"
अमीर आदमी ने बेताबी में समझाने की कोशिश की।
महिला ने अपने हाथ ऊपर किए, अमीर आदमी ने अब तक का सबसे कोमल चेहरा देखा। "कोई बात नहीं," उसने कहा। "आज आप मेरे मेहमान हैं।"
अमीर आदमी ने अविश्वास से सिर हिलाया।
उसे उस दिन अपना बटुआ कभी नहीं मिला, लेकिन उसे एक ऐसी जगह मिली जहाँ सोना लोगों की जेबों में नहीं, बल्कि उनके दिलों में था।
A story by Pemba Umoja