दोपहर के भोजन का सबक

एक छोटी सी चोरी

दोपहर के भोजन का सबक — a story by Pemba Umoja

दादी और बेटा शहर के एक शानदार रेस्तरां में दोपहर के भोजन का आनंद ले रहे थे। वेटर इन दो भोले-भाले दिखने वाले ग्राहकों को अधिक से अधिक बेचने के लिए उत्सुक लग रहा था।

"क्या आप कुछ पीना चाहेंगे? कोई शुरुआती व्यंजन? शायद कुछ कॉफ़ी?"

दादी इतनी विनम्र थीं कि उन्होंने हर चीज़ के लिए हाँ कह दी।

पेय, हाँ। शुरुआती व्यंजन, हाँ। कॉफ़ी, हाँ।

यह एक यादगार दावत थी।

वेटर ने दोनों हाथों से बिल पेश किया।

"मुझे इसका ध्यान रखने दीजिए," बेटे ने कहा।

"बिलकुल नहीं," दादी ने उत्तर दिया। "यह मज़ेदार था, और यह मेरी तरफ़ से है।"

"लेकिन मैं बिल नहीं देख सकता।"

बेटे ने रोशनी पकड़ी ताकि दादी आँकड़े पढ़ सकें।

"अरे!" लागत देखकर बेटा चौंक उठा। "आप दस डॉलर टिप क्यों नहीं छोड़ देतीं? यह पर्याप्त से अधिक है।"

"क्या? नहीं। मैं पंद्रह छोड़ूँगी।"

बेटे ने दादी की उदारता पर सिर हिलाया।

जब यह भोला-भाला दिखने वाला जोड़ा बाहर निकला, वेटर ने बिल उठाया, टिप देखी, और मुस्कुराया।

दादी ने अपने बेटे से फुसफुसाया, "हर किसी में एक छोटी सी चोरी होती है।"

बेटा भ्रमित दिखा।

दादी ने सफ़ेद धारियों वाली एक सस्ती लेकिन आकर्षक प्लास्टिक बॉलपॉइंट कलम उठाकर दिखाई।

"वेटर की कलम," दादी ने शरारती मुस्कान के साथ कहा।

A story by Pemba Umoja