हरित आनंद
हरे आकाश के नीचे एक कैफ़े
टॉरटीन हरे आकाश के नीचे पौधों वाले एक कैफ़े में बैठी, सूखे केलों और स्ट्रॉबेरी से बनी स्मूदी पी रही थी।
“सूखे क्यों?” वह सोचने लगी। “सूखे क्यों?”
फिर अचानक छत खुल गई और एक विशाल झरना बहने लगा।
“हम हर घंटे पौधों को पानी देते हैं,” मेज़बान चिल्लाया। “अपनी छतरियाँ उठा लीजिए।”
बेचारी टॉरटीन इसके लिए बिलकुल भी तैयार नहीं थी। छत से बारिश होने लगी, एक विशाल जलप्रपात की तरह बरसने लगी।
सूखे केले और स्ट्रॉबेरी फूलकर रसीले हो गए।
टॉरटीन पूरी तरह भीग गई।
गीली और हरी-भरी, टॉरटीन ने अपना स्मूदी सूप पिया।
उसके पैरों के पास छोटी-छोटी मछलियाँ तैरने लगीं।
“अपने जूतों का ध्यान रखें,” मेज़बान ग्राहकों से चिल्लाया।
नन्ही पिरान्हा मछलियाँ उसके पैर की उंगलियों के आसपास की सूखी त्वचा को कुतरने लगीं।
एक दलदली हरी-भरी जन्नत में डूबी, टॉरटीन को आखिरकार अपना सुख मिल ही गया।
A story by Pemba Umoja