सावधान
एक बरसात का सबक
“जोसेफ, क्या तुम्हारे पास आज तुम्हारा गृहकार्य है?”
“हाँ,” जोसेफ ने उत्तर दिया।
अध्यापिका ने उसकी शारीरिक भाषा को और करीब से देखा।
जोसेफ अपनी सीट पर सरका।
“ठीक है, इस अभ्यास को पूरा करने के बाद, मैं चाहूँगी कि तुम समस्या क्रमांक तीन का अपना उत्तर बताओ।”
जोसेफ फिर से अपनी सीट पर सरका।
“ठीक है, मिस स्टेला,” उसने उत्तर दिया। “लेकिन क्या मैं पहले बाथरूम जा सकता हूँ?”
“तुम जा सकते हो।”
जोसेफ अपनी कुर्सी से उठा और कक्षा से बाहर चला गया।
बाहर बारिश हो रही थी और ठंड थी। तेज़ हवा चल रही थी।
जोसेफ गलत मोड़ पर मुड़ा और बाहर कदम रखा।
वह तुरंत बारिश की चपेट में आ गया।
दरवाजा उसके पीछे अपने आप बंद हो गया—स्कूल की सुरक्षा।
जोसेफ काँपने लगा क्योंकि बारिश उसके चेहरे, बाहों और पैरों से टपक रही थी।
वह कक्षा की खिड़की तक चला गया और अंदर झाँका।
किसी ने ध्यान नहीं दिया।
अंततः, वह खिड़की पर खरोंचने लगा, जैसे बिना पंजे की बिल्ली।
मेलानी ने झाँका।
“मिस स्टेला,” उसने फुसफुसाया।
मिस स्टेला ने उसे घूर कर देखा।
“जोसेफ बाहर है।”
एक साथ, पूरी कक्षा खिड़की की ओर मुड़ी।
“ओह डियर। मेलानी, कृपया उसे अंदर लाने जाओ। और मेरा कोट भी ले लो।
वह जानता है कि उसे बाहर बाथरूम नहीं जाना चाहिए।
आज, उसे कक्षा के सामने दो समस्याएँ हल करनी होंगी।”
जोसेफ एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार भीगा था।
वह खाली हाथ भी था।
A story by Pemba Umoja