एक यहूदी स्त्री, एक फ़िलिस्तीनी पुरुष
हज़ार खिड़कियों के पार फुसफुसाई गई एक चाह
“मैं तेल अवीव में तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हूँ,” यहूदी लड़की ने फ़िलिस्तीनी पुरुष से कहा।
उसका हृदय धड़कने लगा। जहाँ भी देखता, उसे वही दिखती। सड़क पर चलती हुई। एक कैफ़े में बैठी हुई। उसके सामने खड़ी हुई।
उसने अपना गाल उसके गाल से लगाया। उसने अपना गाल उसके गाल से लगाया।
“मैं तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हूँ। तुम कब आओगे?” उसने फुसफुसाया।
और शरीर गिर रहे थे, तट पर लुढ़कती लहरों की तरह।
वहाँ वह थी, खिड़की से बाहर देखती हुई।
हज़ार खिड़कियाँ दूर।
घूमती रेखाओं वाले खरोंच भरे शीशे के पार।
उनकी साँसों के नीचे खिड़कियाँ धुँधली हो गईं।
उनके गाल छू गए।
“कब?” उसने पूछा।
लहरें टूटीं।
लहरें टूटीं।
लहरें टूटीं।
A story by Pemba Umoja