हम सब अस्तित्व की पच्चीकारी के टुकड़े हैं।

पेम्बा उमोजा द्वारा एक सूक्ति

कविता “पुनः स्वयं में” से

हम सब अस्तित्व की पच्चीकारी के टुकड़े हैं।
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