दुनियाओं पार
भले ही दुनियाओं पार
मैं तुम्हारे साथ होती हूँ
जब मैं सोती हूँ
भले ही
नहीं लेटी हूँ मैं
तुम्हारे पहलू में
तुम्हारी साँस महसूस होती है
मेरी गर्दन पर
भले ही
नहीं लेते तुम साँस
मुझ पर
तुम्हारा हाथ महसूस होता है
मेरी कमर के गिर्द
भले ही
नहीं छूते तुम मुझे
इस गर्म बिस्तर में
हम सोते हैं
एक दूजे के ख़्वाबों में आराम करते
भले ही
दुनियाओं पार
A poem by Pemba Umoja