फुसफुसाती लहरें
स्मृति और समुद्र पर एक ध्यान

अरे, कितनी सारी चीज़ें तुमसे बोलती हैं
समुद्र के किनारे
तुम्हें वापस बुलाती हैं
स्मृति के महासागर में
जैसे मछलियाँ अचानक उभरती हैं
गहराइयों से
कुछ डॉल्फ़िन
कुछ शार्क
हर एक लहरों से फुसफुसाती
जैसे वे टकराती और लौटती हैं
टकराती और लौटती हैं
Pemba Umoja की एक कविता