विशिष्ट रूप से मानवीय

जो मशीनें कभी नहीं उठा सकतीं

विशिष्ट रूप से मानवीय — a poem by Pemba Umoja

लोगोस, एथोस, पैथोस

इन सबमें से
पैथोस सदैव विशिष्ट रूप से मानवीय रहेगा

हर यांत्रिक विजय से परे

सदा के लिए जड़ा हुआ
हड्डियों और रक्त में।

कुछ लोग भावना से नाक-भौं सिकोड़ते हैं
उसे दबा देना चाहते हैं

कोशिकाओं को चिप से बदलते हुए
और चिप को कोशिकाओं से।

विचारों को बाहर सौंपा जा सकता है
लोगोस, एथोस को भी

पर पैथोस को प्रोग्राम नहीं किया जा सकता।

वह केवल धड़कनों के माध्यम से बहता है
धड़कते हुए हृदयों की

अदम्य
सर्वव्यापी
अबुझ।

A poem by Pemba Umoja