तीन गिरे
चट्टान पर मूक साक्षी।
तीन मृतकों का मौन
बांज वृक्षों में परिणत हुआ
सहस्रों करतल-से हाथों के साथ
छाल, समय के रहस्यों से भी घनी
पथरीली चट्टानों के पास।
तीन पुरुष गिरे
गोलियों या तीरों से बिंधकर
कहते हैं, उनका रक्त खारे जल में जा मिला
उनका कुछ भी शेष नहीं
न उनके नाम
न उनकी जन्म-तिथियाँ
न उनके मूल
केवल एक कविता
एक चित्र
उनके होने की एक छाप
अंकित हैं दीवारों पर
Fort Henry James की।
A poem by Pemba Umoja