सपने देखने वालों की भाषा
भीतर के विपरीतों के टकराव पर
सपने देखने वालों की भाषा
नर्तक कवि
मुँह में पिघलती है
ग्रेनिटा हेलाडोस की तरह
इंजीनियरों की भाषा
तालू पर चोट करती है
पेंचों की तरह
सब खून बहाते हैं
कैसा शोर मचाते हैं वे
जब मिलते हैं
कहते हैं
विपरीत आकर्षित होते हैं
प्रेमी और इंजीनियर
तेज़ और मृदु
कठोर और चिकना
अच्छाई और बुराई
बचाओ हम सबको
जब मन
एक से अधिक भाषा धारण करता है
कैसा कठोर नृत्य
कुश्ती के मैच जैसा
जब तक कोई दबा न दिया जाए
और कोई फिर से साँस ले
A poem by Pemba Umoja