तारों की रोशनी

एक अनंत ब्रह्मांड में प्रेम करना

तारों की रोशनी — a poem by Pemba Umoja

मुझे लोग प्रिय हैं

और प्रेम भी।

मेरा हृदय कटोरे की तरह नहीं भरता।

वह एक अनंत ब्रह्मांड की तरह फैलता है।

तारों से भरा हुआ

रात के आकाश को रोशन करते हुए।

शायद जो हम देखते हैं

वही हम हैं।

शायद मैं एक ब्रह्मांड हूँ।

शायद तुम भी एक हो।

शायद मैं तुम्हारे ब्रह्मांड का एक तारा हूँ।

तुम मेरे ब्रह्मांड में एक हो।

चमकीले प्रकाश से।

दूर से।

तारों को निहारते हुए

प्रेम की चमक।

हम दोनों की ओर हाथ बढ़ाते हैं।

हमारी उँगलियाँ फैलती हैं

पर कभी छूती नहीं।

Pemba Umoja की एक कविता

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