विशेष दिन
चावल के एक दाने में छिपी खुशी

आँख का चमकता सफ़ेद,
जगमगाता,
चमचमाते दाँतों के ऊपर,
एक चौड़े अर्धचंद्र में खुला।
आँखें आसमान की ओर लुढ़कतीं।
एक और भरा हुआ चम्मच।
गाल अनमोल दानों से भरे।
अरे, जीभ पर वह बनावट और स्वाद।
आँखें लुढ़कती हैं।
हँसी छूटती है।
आज एक विशेष दिन है…
बाजरे की जगह चावल है।
Pemba Umoja की एक कविता