विशेष दिन

चावल के एक दाने में छिपी खुशी

विशेष दिन — a poem by Pemba Umoja

आँख का चमकता सफ़ेद,
जगमगाता,
चमचमाते दाँतों के ऊपर,
एक चौड़े अर्धचंद्र में खुला।
आँखें आसमान की ओर लुढ़कतीं।
एक और भरा हुआ चम्मच।
गाल अनमोल दानों से भरे।
अरे, जीभ पर वह बनावट और स्वाद।
आँखें लुढ़कती हैं।
हँसी छूटती है।
आज एक विशेष दिन है…
बाजरे की जगह चावल है।

A poem by Pemba Umoja