नींद में सपने देखने वाला

सपने के भीतर सपना

नींद में सपने देखने वाला — a poem by Pemba Umoja

एक बार एक ऊंघता स्वप्नदृष्टा,
एक मचलती लहर बाघ बन गई
और किनारे-किनारे चलने लगी।
‘तुम्हें क्या चाहिए?’
उस ऊंघते स्वप्नदृष्टा ने पूछा
बाघ से,
पर बाघ ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह बस देखता रहा।
बाघ की आँख के भीतर,
उस ऊंघते स्वप्नदृष्टा ने चाँद को देखा
समुद्र से उगते हुए।
और जैसे ही वह चाँद उगा,
एक मचलती लहर बंदर बन गई
और किनारे-किनारे चलने लगी।
‘तुम्हें क्या चाहिए?’
उस ऊंघते स्वप्नदृष्टा ने पूछा
बंदर से,
पर बंदर ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह बस देखता रहा।
और बंदर की आँख के भीतर,
उस ऊंघते स्वप्नदृष्टा ने बाघ को देखा
बहुत गहरी नींद में सोते हुए
और चाँद पर खर्राटे लेते हुए।

A poem by Pemba Umoja