हिलाओ

जब स्याही सूख जाए

हिलाओ — a poem by Pemba Umoja

मेरी कलम
सूखने वाली है
लेकिन मेरी कविता
अभी भी बोलती है
कितनी सारी
मैंने बस फुसफुसाई
हवा में
यह उम्मीद करते हुए
कि आसमान…
हिलाओ,
हिलाओ
थोड़ी और स्याही है
लेकिन कविता
निकल रही है
मेरी पकड़ से
हिलाओ,
हिलाओ
हिलाओ
हिलाओ
हिलाओ…
लगता है सबक
दो कलमें रखना है

A poem by Pemba Umoja