सुगंध
लेकिन उनकी सुगंध रह जाती है।
मुझे चॉकलेट की गंध आती है
और पाइप के धुएँ की
और
इत्र की।
कुछ लोग साइकिलें थामे चलते हैं।
अन्य अवज्ञा कर चलाते हैं।
सूरज उन्हें ओझल कर देता है।
वे परछाइयों में बदल जाते हैं।
लेकिन उनकी सुगंध रह जाती है।
उनके होने की निशानियाँ।
अगली हवा के झोंके तक ठहरती हुई।
पदचापों और बातों की तरह
जो गूँज में विलीन हो जाती हैं।
वैसे ही,
धड़कनें
और साँसें।
उन सब का
समय
कम हो रहा।
A poem by Pemba Umoja