बारिश की बूँदें
समय बताती बारिश की बूँदें
“काश मैं बारिश में दौड़ पाती,” उस बुज़ुर्ग महिला ने उस युवा व्यक्ति से कहा जो बारिश की बूँदों में भीगा हुआ था।
बारिश की बूँदों की टिप-टिपाहट
खिड़कियों पर,
समय बता रही थी
लहरों में।
वह युवा व्यक्ति
बादलों को छोड़ रहा था
धूसर हवाओं संग उड़ता हुआ।
वह बुज़ुर्ग महिला
धरती पर उतर चुकी थी
गहरे पोखरों में बहती हुई।
यह तो बस बात थी
टिप-टिपाहट की।
बारिश की बूँदें
समय बताती हुई
हमारा भाग्य लिए
हर बूँद में।
A poem by Pemba Umoja