हवासिल तट
चोंच से चोंच, अंडों पर, समय के साथ
हवासिल उड़कर पेड़ पर
जहाँ गंगा-चिल्ली राह देखे
एक घोंसला बनता है
गंगा-चिल्ली और हवासिल
चोंच से चोंच
अंडों पर
उन्हें सिखाते
मछली पकड़ना
उड़ना
हवासिल उड़कर पेड़ पर
तूफ़ान के बीच
नीले-पैर बूबी
घूरता
हवासिल ठहरता है
मन में तैरे गंगा-चिल्ली
हवासिल
और नीले-पैर बूबी
चोंच से चोंच
एक पतली डाल पर
अंडों पर
हवासिल उड़ता है
पेड़-पेड़ पर
ठहरता
मन में तैरें गंगा-चिल्ली और नीले-पैर बूबी
झिल्लीदार पैर
चोंच से चोंच
एक पतली डाल पर
अंडों पर
कितनी ही पतली डालियाँ
कुछ टूटी हुई
हवासिल उड़ता है।
A poem by Pemba Umoja