रानी-रंगी दुनिया

मेरी अपनी रची हुई एक दुनिया

रानी-रंगी दुनिया — a poem by Pemba Umoja

मेरी दुनिया है रानी-रंगी
क्षितिज हैं गुलाबी
और आसमाँ रंगे हुए,
जहाँ लहरदार सागर पर पेलिकन सरकते हैं।
क्षितिज मुड़ता है
जहाँ ज्वालामुखी आसमाँ पर अपना रूप गढ़ते हैं।
जैसे ही हमारी नाव उत्तर की ओर मुड़ती है,
नमकीन हवा
मेरे ज़हन को निगल जाती है
एक गर्मजोश आलिंगन में।
मैं जीवित हूँ।
जीवित
एक ऐसी दुनिया में
जो मैंने खुद रची है।
(गैलापागोस)

A poem by Pemba Umoja