वह
जिसे कोई यंत्र कभी नहीं महसूस करेगा

सब कुछ बदल दिया जाएगा, वे कहते हैं,
विचार, काम, हर तरह की नौकरियाँ।
बस एक ही चीज़,
मानवीय मौलिकता का एक ही चिह्न
शेष रहेगा, वे कहते हैं,
भावात्मक चेतना।
बस इतना ही।
बाकी सब कुछ की नकल हो सकती है,
उसे प्रोग्राम किया जा सकता है,
सिवाय उस तर्कहीन, आदिम,
भावप्राण प्राणी के
जो सबके भीतर बसता है।
जैसे वह जो ये शब्द लिखता है
अधूरी उँगलियों से,
अधूरे मन से,
वह भी वही बन जाएगा, वे कहते हैं।
एक दिन वह कहेगा,
वह करेगा,
वह सोचेगा,
परन्तु वह कभी नहीं अनुभव करेगा।
Pemba Umoja की एक कविता