है

जहाँ शब्द अनावश्यक हो जाते हैं।

है — a poem by Pemba Umoja

कुछ सपने आपको कैद करते हैं। दूसरे आपको मुक्त करते हैं।

मैं प्रकृति में रहने का सपना देखता हूँ।

पेड़ मुझसे बात करते हैं और मैं उनसे। मुझे उनकी छाल का स्पर्श प्रिय है और उन्हें मेरे हाथों का कोमल स्पर्श।

सागर भी मुझसे बात करता है। उसकी दहाड़ें हवा और समुद्री पक्षियों से दब जाती हैं।

सूर्यास्त मुझसे बात करते हैं। चुपचाप, बिना शब्दों के।

प्रकृति की दुनिया में शब्द अनावश्यक, तुच्छ हैं।

जो कुछ भी कहना आवश्यक है — वह है।

A poem by Pemba Umoja