वह स्वयं
स्वायत्तता पर एक चिंतन
उसे होने दो
उसे होने दो
वह स्त्री जो वह बनना चाहती है
वे सपने जो वह संजोती है
तुम्हारी कक्षा का चाँद नहीं
बल्कि आकाश में एक और ग्रह
जिसे कई लोग
तारा समझ लेते हैं
जो चमकता है
एक रंग में
जो पूरी तरह उसका अपना है
A poem by Pemba Umoja