नायक का उदय
केवल शत्रु ही नायक के पतन का जश्न मनाते हैं।
पाप है एक
अंधेरा योद्धा
उतरता हुआ
किसी
मासूम पर
उन्हें बहलाता
हुआ
प्रलोभन में
उन्हें लपेटता
एक जाल में
दुःखों के।
क्या है
पाप का रोमांच?
एक उछाल
एक झटका
एक चढ़ाई फिर एक पतन
एक लंबा अपराध-बोध से भरा
पतन।
एक अपमान
स्वयं के सामने
परिवार के सामने
ईश्वर के सामने
केवल शत्रु ही
जश्न मनाते हैं
एक नायक के पतन का।
परंतु ईश्वर
उसे कभी नहीं त्यागते
चाहे कितनी ही बार
वह फिसले
जब तक वह समर्पित कर दे
हर एक कण
अपनी आत्मा का।
A poem by Pemba Umoja