एक का ध्येय
एक शांत प्रण, एक-एक छोटी चीज़ को गिनते हुए।
यदि मैं कर पाता
एक नेक काम
यदि मैं अपनी आत्मा को जगा पाता
एक नए तरीक़े से
यदि मैं अपने शरीर को मिला पाता
एक नई गति से
एक नई अनुभूति से
एक नई लय से
यदि मैं अपने मन को समृद्ध कर पाता
एक ताज़े विचार से
यदि मैं मिल पाता
एक नए दोस्त से
बाँट पाता एक नई हँसी
रो पाता एक नया रोना
बढ़ा पाता हाथ
एक नई रूह की ओर
हर उस नए दिन
जब मैं जागता
साँस लेता
और घूमता
इस उपजाऊ धरती पर
तो कैसा इंसान
मैं बन जाता।
A poem by Pemba Umoja