तैरता हुआ
वीरान सुंदरता।
सफेद बिंदु जिन्हें तरंगें कहते हैं मीलों नीचे,
धागों और बादलों के गुच्छों की भूलभुलैया से होकर,
नीले के एक द्वीप से घिरा हुआ।
छाती चौड़ी हुई।
फैली हुई उंगलियों से हवा और धुआँ बहता हुआ।
सूरज कांस्य त्वचा को झुलसाता और लाल करता;
मेरी पीठ भुनती हुई।
मेरे पैरों की उंगलियों से हवा बहती, गुदगुदी करती।
ताज़ा और साफ़,
तैरता हुआ
स्वर्ग के बीच,
ताकते बादलों की सेना के बीच।
अकेला—
लेकिन यादों की संगत से भरा हुआ।
चुप—
लेकिन अपने साहस को सराहता और ताली बजाता
खोजने और छूने का,
और डरने से नहीं।
A poem by Pemba Umoja