समाहित

समर्पण और प्रेम

समाहित — a poem by Pemba Umoja

बारिश में बाहर नग्न लेटा हुआ,

ठंडी बूँदें बरसती हैं मेरी झनझनाती सुन्नता पर।

पानी की धाराएँ

नीचे एक भूलभुलैया में बहती हैं।

हाथ फैलाए हुए,

सड़क पर मुँह के बल—

कोई सीमा नहीं,

कोई भय नहीं।

मैं आनंद में हूँ।

तुम्हारा प्रेम मुझे समेट लेता है;

मैं तुममें समाहित हूँ।

Pemba Umoja की एक कविता